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श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम&a

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  • #61
    Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235







    ...............................श्रीः
    ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
    **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
    ---------------
    पिङ्गे पिङ्गाक्षमुख्यस्य बृहती परिमण्डले।
    चक्षुषी संप्रकाशेते चन्द्रसूर्याविवोदितौ॥ ६८ ॥

    ---------www.brahminsnet.com------------------
    पिङ्गाक्षमुख्यस्य...- வானரச்ரேஷ்டருடைய
    पिङ्गे ..................- பிங்களவர்ணமான
    बृहती.................- பெரிய
    चक्षुषी................- இரு கண்கள்....
    परिमण्डले
    ........- பரிமண்டலத்தில்
    उदितौ...............- உதயமான
    चन्दरसूर्यौ ........- சந்திரஸூர்யர்கள்
    इव ..................- போல
    संप्रकाशेते .......- நன்கு விளங்கின.
    ---------------- End of 68 --------------------



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    • #62
      Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&







      ...............................श्रीः
      ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
      **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
      ---------------
      मुखं नासिकया तस्य ताम्रया ताम्रमाबभौ।
      सन्ध्यया समभिस्पृष्टं यथा सूर्यस्य मण्डलम् ॥69 ॥

      ---------www.brahminsnet.com------------------
      तस्य................- அவருடைய
      ताम्रया ...........- சிவந்த
      नासिकया.......- மூக்கினால்
      ताम्रं मुखं.......- சிவந்த முகம்....
      सन्ध्यया
      .......- சந்தியின்செம்மையினால்
      समभिस्पृष्टं....- வ்யாபிக்கப்பட்ட
      सूर्यस्य .........- சூரிய
      मण्डलं ........- மண்டலம்
      यथा आबभौ..- போல விளங்கிற்று.
      ---------------- End of 69 --------------------



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      • #63
        Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






        ...............................श्रीः
        ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
        **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
        ---------------
        लाङ्गूलञ्च समाविद्धं प्लवमानस्य शोभते।
        अम्बरे वायुपुत्रस्य शक्रध्वज इवोच्छ्रितः ॥७० ॥

        ---------www.brahminsnet.com------------------
        प्लवमानस्य...- தாவுகிற
        वायुपुत्रस्य ....- வாயுகுமாரருடைய
        समाविद्धं......- உயரேஎடுத்த
        लांगूलं च......- வாலும்....
        अम्बरे
        ........- ஆகாயத்தில்
        उच्छ्रितः.......- உயர்த்தி நாட்டப்பட்ட
        चक्रध्वजः ...- இந்த்ர த்வஜம்
        इव ...........- போல
        शोभते........- திகழ்ந்தது.
        ---------------- End of 70 --------------------



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        • #64
          Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






          ...............................श्रीः
          ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
          **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
          ---------------
          लाङ्गूलचक्रेण महान् शुक्लदंष्ट्रोऽनिलात्मजः।
          व्यरोचत महाप्राज्ञः परिवेषीव भास्करः॥७१ ॥

          ---------www.brahminsnet.com------------------
          शुक्लदंष्ट्रः........- வெளுத்த கோரைப்பற்களை
          ............c...........உடையவரும்
          महान् ...........- மஹிமையுடையவரும்
          महाप्राज्ञः........- மிகச்சிறந்த புத்திமானும்
          अनिलात्मजः..- வாயுகுமாரர்....
          लांगूलचक्रेण
          ..- வாலின் வட்டத்தினால்
          परिवेषी.........- பரிவேடம் சூழ்ந்த
          भास्करः ......- ஸூரியனைப்
          इव ..............- போல
          व्यरोचत........- விளங்கினார்.
          ---------------- End of 71 --------------------



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          • #65
            Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






            ...............................श्रीः
            ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
            **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
            ---------------
            स्फिग्देशेनाभिताम्रेण रराज स महाकपिः ।
            महता दारितेनेव गिरिर्गैरिकधातुना॥७१ ॥

            ---------www.brahminsnet.com------------------
            सः महाकपिः..- அப்பெரியவானரர்
            अभिताम्रेण ...- மிகச்சிவந்த
            स्फिग्देशेन....- வாலின் அடியினால்
            महता...........- பெரிய...
            दारितेन
            .......- பிளக்கப்பட்ட
            गौरिक........- கைரிகமென்னும்
            धातुना ......- காவிக்கல்லினால்
            गिरिः इव ..- மலைபோல
            रराज.........- விளங்கினார்.
            ---------------- End of 72 --------------------



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            • #66
              Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






              ...............................श्रीः
              ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
              **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
              ---------------
              तस्य वानरसिंहस्य प्लवमानस्य सागरम् ।
              कक्षान्तरगतो वायुर्जीमूत इव गर्जति ॥ ७३ ॥

              ---------www.brahminsnet.com------------------
              सागरं.............- ஸமுத்திரத்தை
              प्लवमानस्य ...- தாண்டுகின்ற
              तस्य..............- அந்த
              वानरसिंहस्य..- வானரசிம்மத்தின்...
              कक्षान्तरगतः
              .- கட்கங்களினூடேசெல்லும்
              वायुः.............- காற்று
              जीमूतः ........- கருமுகில்
              इव .............- போல
              गर्जति..........- கர்ஜித்தது.
              ---------------- End of 73 --------------------



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              • #67
                Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






                ...............................श्रीः
                ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                ---------------
                खे यथा निपतन्त्युल्का ह्युत्तरानताद्विनिस्सृता ।
                दृश्यते सानुबन्धा च तथा स कपिकुञ्चरः ॥ ७४ ॥

                ---------www.brahminsnet.com------------------
                खे...............- ஆகாயத்தில்
                उत्तरान्तात् ..- வடதிசையிலிருந்து
                विनिस्सृता...- தோன்றி
                निपतन्ती च.- விழுகிறதும்...
                सानुबन्धा
                ....- வாலுடன்கூடியதுமான
                उल्का यथा.- கொள்ளி எப்படியோ
                तथा हि .....- அப்படி
                सः ............- அந்த
                कपिकुञ्चरः.- வானரவீரர்
                दृश्यते.......- காணப்பட்டார்.
                ---------------- End of 74 --------------------



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                • #68
                  Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






                  ...............................श्रीः
                  ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                  **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                  ---------------
                  पतत्पतङ्गसङ्काशो व्यायतः शुशुभे कपिः ।
                  प्रवृद्ध इव मातङ्गः कक्ष्यया बध्यमानया ॥ ७५ ॥

                  ---------www.brahminsnet.com------------------
                  पतत्पतङ्गसङ्काशः....- உதிக்கும்
                  .................................ஸூரியனுக்கு நிகரான
                  व्यायतः कपिः.........- நெடிய வானரர்
                  बध्यमानया............- கட்டிக்கொண்டிருக்கிற
                  कक्ष्यया.................- அரைக்கச்சையால்...
                  प्रवृद्धः
                  ...................- மதங்கொண்ட
                  मातङ्गः इव...........- யானைபோல்
                  शुशुभे.................- விளங்கினார்.
                  ---------------- End of 75 --------------------



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                  • #69
                    Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






                    ...............................श्रीः
                    ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                    **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                    ---------------
                    उपरिष्टाचछरीरेण छायया चावगाढया ।
                    सागरे मारुताविष्टा नौरिवासीत्तदा कपिः ॥ ७६ ॥

                    ---------www.brahminsnet.com------------------
                    उपरिष्टात्.....- மேலே
                    शरीरेण ......- சரீரத்தாலும்
                    सागरे.........- ஸமுத்திரத்தில்
                    अवगाढया..- அழுந்தியிருக்கிற...
                    छायया च
                    ...- நிழலினாலும்
                    मारुताविष्टा- காற்றினால் மோதப்பட்ட
                    नौः इव......- மரக்கலம் போல
                    कपिः .......- வானரர்
                    तदा ........- அப்பொழுது
                    आसीत्....- தோன்றினார்.
                    ---------------- End of 76 --------------------



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                    • #70
                      Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






                      ...............................श्रीः
                      ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                      **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                      ---------------
                      यं यं देशं समुद्रस्य जगाम स महाकुपिः ।
                      स स तस्याङ्गवेगेन सोन्माद इव लक्ष्यते ॥ ७६ ॥

                      ---------www.brahminsnet.com------------------
                      समुद्रस्य........- ஸமுத்திரத்தின்
                      यं यं देशं ......- எவ்வெவ்விடத்தை
                      सः महाकपिः.- அப்பெரிய வானரர்
                      जगाम..........- அடைந்தாரோ...
                      सः सः
                      ..........- அவ்வவ்விடமும்
                      तस्य...........- அவருடைய
                      अङ्गवेगेन.....- சரீரவேகத்தால்
                      सोन्माद ......- மிகவும்கலங்கியதைப்
                      इव .............- போல
                      लक्ष्यते.........- காணப்பட்டது.
                      ---------------- End of 77 --------------------



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                      • #71
                        Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&#235






                        ...............................श्रीः
                        ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                        **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                        ---------------
                        सागरस्योर्मिजालानि उरसा शैलवर्ष्मणा ।
                        अभिघ्नंस्तु महावेगः पुप्लुवे
                        स महाकुपिः ॥ ७८ ॥
                        ---------www.brahminsnet.com------------------
                        महावेगः.........- அதிவேகமுடைய
                        सः महाकपिः..- அந்த வானரச்ரேஷ்டர்
                        शैलवर्ष्मणा....- மலைக்கு நிகரான...
                        उरसा तु
                        ........- (தன்) மார்பினாலேயே
                        सागरस्य.......- ஸமுத்திரத்தின்
                        ऊर्मिजालानि- அலைகளை
                        अभिघ्नन् .....- மோதித்தள்ளிக்கொண்டு
                        पुप्लुवे .........- தாவிச்சென்றார்.

                        ---------------- End of 78 --------------------



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                        • #72
                          Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&






                          ...............................श्रीः
                          ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                          **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                          ---------------
                          कपिवातश्च बलवान् मेघवातश्च निस्सृतः ।
                          सागरं भीमानिर्घोषं कम्पयामासतुर्भृशम् ॥ ७९ ॥
                          ---------www.brahminsnet.com------------------
                          बलवान्...........- மிக வலிமையுடையதாய்
                          निस्सृतः..........- தோன்றிய
                          कपिवातः च....- வானரரின் காற்றும்...
                          मेघवातः च
                          ......- மேகத்தின் காற்றும்
                          भीमानिर्घोषं....- அச்சமூட்டும் ஒலியுடைய
                          सागरं ............- ஆழ்கடலை
                          भृशम् ............- மிகவும்
                          कम्पयामासतुः.- அலைத்துக் கலக்கின.

                          ---------------- End of 79 --------------------



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                          • #73
                            Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&






                            ...............................श्रीः
                            ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                            **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                            ---------------
                            विकर्षन्नूर्मिजालानि ब्रृहन्ति लवणांभसि ।
                            पुप्लुवे कपिशार्दूलो विकिरन्निव रोदसी ॥ ८० ॥
                            ---------www.brahminsnet.com------------------
                            लवणांभसि......- உப்புநீர் கடலில்
                            बृहन्ति............- பருத்துயர்ந்த
                            ऊर्मिजालानि..- அலைகளின் ஜாலங்களை...
                            विकर्षन्
                            .........- இழுத்துச்செல்கின்ற
                            कपिशार्दूलः...- வானரச்ரேஷ்டர்
                            रोदसी .........- ஆகாயத்தையும் பூமியையும்
                            विकिरन् इव - பிரிப்பவர் போல
                            पुप्लुवे...........- தாவினார்.

                            ---------------- End of 80 --------------------



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                            • #74
                              Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&






                              ...............................श्रीः
                              ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                              **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                              ---------------
                              मेरुमन्दरसङ्काशानुद्गतान् स महार्णवे ।
                              अत्यक्रामन्महावेगस्तरङ्गान् गणयन्निव ॥ ८१ ॥
                              ---------www.brahminsnet.com------------------
                              महावेगः सः.- மிகவேகமுடைய அவர்
                              महार्णवे......- மஹார்ணவத்தில்
                              उद्गतान्......- மேலெழுந்த...
                              मेरुमन्दर....- மேருமந்தரமலைக்கு
                              सङ्काशान्...- நிகராக உயர்ந்த
                              तरङ्गान् .....- அலைகளை
                              गणयन् ......- எண்ணுபவரை
                              इव.............- போல
                              अत्यक्रामत्.- தாண்டினார்.
                              ---------------- End of 81 --------------------



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                              • #75
                                Re: श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्ड&






                                ...............................श्रीः
                                ॥ श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
                                **********प्रथमः सर्गः। १ ।।
                                ---------------
                                तस्य वेगसमुद्धूतं जलं सजलदं तदा ।
                                अम्बरस्थं विबभ्राज शारदाभ्रमिवाततम् ॥ ८२ ॥
                                ---------www.brahminsnet.com------------------
                                तस्य.............- அவருடைய
                                वेग..............- வேகத்தால்
                                समुद्धूतं......- உயரேகிளப்பப்பட்ட.
                                स जलं........- மேகத்துடன் கூடிய
                                जलं............- ஸமுத்ரஜலம்
                                तदा ...........- அப்பொழுது
                                अम्बरस्थं ...- ஆகாயத்தில் உள்ள
                                आततं.........- அகன்ற
                                शारदाभ्र इव- கார்மேகம்போல
                                विबभ्राज.....- விளங்கிற்று.
                                ---------------- End of 82 --------------------



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