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Education is waste, if not practised - Subhashitam - Sanskrit

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  • Education is waste, if not practised - Subhashitam - Sanskrit

    अगुणस्य हतं रूपं अशीलस्य हतं कुलम्।
    असिद्धेस्तु हता विद्या अभोगस्य हतं धनम्॥


    – सुभाषितरत्नभाण्डागार-


    Beauty is of no use if you do not have right qualities. Being born in a good family is useless unless you develop character. If not practiced, education is of no use. If not used (enjoyed) wealth is of no use.






    असन्तो नाभ्यर्थ्याः सुहृदपि न याच्यः कृशधनः प्रिया न्याय्या वृत्तिर्मलिनमसुभङ्गेऽप्यसुकरम्।
    विपद्युच्चैः स्थेयं पदमनुविधेयं च महतां सतां केनोद्दिष्टं विषममसिधाराव्रतमिदम्॥


    दुष्टों की प्रार्थना - याचना बिलकुल न करना, निर्धन या अल्प धन वाले सज्जन मित्र से भी किसी प्रकार की आर्थिक सहायता की उम्मीद न करना, न्यायपूर्वक जीवन बिताने में अभिरुचि रखना, जान जाने का भय होते हुए भी गलत काम में बिलकुल भी शामिल न होना, विपत्तिकाल या विपरीत परिश्थितियों में भी धैर्य रखना तथा महान लोगों के दिखाए गए रास्ते पर चलना; इस प्रकार के तलवार की धार पर चलने जैसे मार्ग को अपनाकर जीवन जीने वाले सत्पुरुषों को यद्यपि किसी ने भी उपदेश नहीं दिया है फिर भी सज्जन पुरुष स्वभाव से ही इनका पालन किया करते हैं !


    Not supplicating evil men, not begging even of a noble-minded person when he is in reduced circumstances, regard for a just mode of behaviour, incapability of putting one's hand to a dirty work even at the risk of life, living in a dignified manner in misfortune, and following the footsteps of the great: No One has ever dictated this hard course difficult as the walking on the edge of a sword to the good, but its keeping is quite natural to them.


    Courtesy C N Mahabal
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