श्रीः
।। श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् – सुन्दरकाण्डम्॥
प्रथमः सर्गः। १ ।।
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मुमोच च शिलाः शैलो विशालाः समनःशिलाः।
मध्यमेनार्चिषा जुष्टो धूमराजीरिवानलः॥ १९ ॥।।
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च - மேலும்
शैलः - மலை
समनःशिलाः - மனோசிலையுடன் கூடிய
विशालाः - அகன்ற
शिलाः - கற்பாறைகளை
मध्यमेन - நடுத்தரமான
अर्चिषा - அக்னிஜ்வாலையோடு
जुषः - கலந்து கிளம்புகிற
अनलः - நெருப்பு
धूमराजीः - புகைப்படலங்களை
इव - போல்
मुमोच - வீழ்ந்தது.


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