श्रीः
।। श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
प्रथमः सर्गः। १ ।।

हरिणा पीड्यमानेन पीड्यमानानि सर्वशः।
गुहाविष्टानि भृतानि विनेदुर्विकृतैः स्वरैः ॥ २० ॥।।
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हरिणा - வானரரால்
पीड्यमानेन - நெருக்குண்டதால்
गुहाविष्टानि - குகைகளில் புகுந்திருந்த
भूतानि - விலங்குகள்
सर्वशः - நாலாபக்கங்களிலும்
पीड्यमानानि - நெருக்குண்டவைகளாய்
विकृतैः - பரிதாபமான
स्वरैः - குரல்களில்
विनेदुः - அலறின.
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