श्रीः
।। श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् – सुन्दरकाण्डम्॥
प्रथमः सर्गः। १ ।।
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तेन पादपमुक्तेन पुष्पौधेण सुगन्धिना।
सर्वतः संवृतः शैलो बभौ पुष्पमयो यथा ॥ १५ ॥।।
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पादपमुक्तेन – மரங்களிலிருந்து விழுந்த
तेन - அந்த
सुगन्धिना - நறுமணமுள்ள
पुष्पौधेण - மலர்க்குவியல்களால்
सर्वतः - இடைவெளியில்லாமல்
संवृतः शैलः - மூடுண்ட மலை
पुष्पमयः यथा - புஷ்பமயமாய்
बभौ - விளங்கிற்று

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