श्रीः
।। श्रीमद्वाल्मीकिरामायणम् सुन्दरकाण्डम्॥
प्रथमः सर्गः। १ ।।

तेन चोत्तमवीर्येण पीड्यमानः स पर्वतः।
रीतीर्निर्वर्तयामास काञ्चनाञ्जनराजतीः ॥ १८ ॥
।।
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उत्तमवीर्येण - சிறந்த வீரமுடைய
तेन - அவரால்
पीड्यमानः - ஊன்றப்பட்ட
सः - அந்த
पर्वतः च - மலையும்
काञ्चनाञ्जनराजतीः - ஸுவர்ணம், மை,
வெள்ளி இவைகளில்
रीतीः - ரேகைகளை
निर्वर्तयामास - (பிளவுகளில்)
தெரியச்செய்தது.
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